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Vatt Shamak Mukhvas

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इस जड़ी-बूटी के लाभ
- पाचन ठीक से होता है।
- अतिरिक्त हवा बाहर निकल जाती है और शरीर आराम और ताजगी का अनुभव करता है।
- कब्ज और पेट के अन्य रोगों में लाभकारी।
- शरीर में वायु बढ़ने से जोड़ों का दर्द होता है, यह जड़ी-बूटी इस दर्द में राहत देता है।

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वातशामक जड़ी-बूटी

आयुर्वेद के अनुसार सिर्फ वात के प्रकोप से होने वाले रोगों की संख्या ही 80 के करीब है।

हमारे शरीर की मुख्य तीन प्रकृति। वात, पित्त और कफ। यह प्रकृति जन्म के साथ आकार लेती है। संतुलन में रहने पर शरीर स्वस्थ रहता है और इस संतुलन में गड़बड़ी होने पर शरीर रोगिष्ट होता है। उदाहरण के लिए, जब वात प्रकृति के व्यक्ति के अंदर वात की मात्रा बढ़ जाए, तो शरीर में कब्ज, पेट में ऐंठन, अनिद्रा, पेट में दर्द, पीठ और काठ का दर्द, चिड़चिड़ापन, जोड़ों का दर्द आदि बढ़ा देता है।

इस जड़ी-बूटी के लाभ
– पाचन ठीक से होता है।
– अतिरिक्त हवा बाहर निकल जाती है और शरीर आराम और ताजगी का अनुभव करता है।
– कब्ज और पेट के अन्य रोगों में लाभकारी।
– शरीर में वायु बढ़ने से जोड़ों का दर्द होता है, यह जड़ी-बूटी इस दर्द में राहत देता है।

वात बढ़ जाने के लक्षण
– अंगों में रूखापन और जकड़न
– हड्डियों के जोड़ों में ढीलापन
– हड्डियों का खिसकना और टूटना
– अंगों में कमजोरी महसूस होना एवं अंगों में कंपकपी
– अंगों का ठंडा और सुन्न होना
– कब्ज़
– नाख़ून, दांतों और त्वचा का फीका पड़ना
– मुंह का स्वाद कडवा होना

अगर आपमें ऊपर बताए गये लक्षणों में से 2-3 या उससे ज्यादा लक्षण नजर आते हैं तो यह दर्शाता है कि आपके शरीर में वात दोष बढ़ गया है। ऐसे में नजदीकी चिकित्सक के पास जाएं और अपना इलाज करवाएं।

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